जो है मुझको कहनाआज कहने दो
उजाले यादों के अपनी
साथ मेरे रहने दो
जो है मुझको कहना
आज कहने दो
बार बार पलकें गिराया न करो
धूप में निकल के जाया न करो
धूप में तेरा रेशमी बदन पिघल जाएगा
पिघल गया तो
आशिक अकेला हो जाएगा
मुझको अपने साये में
साये में रहने दो
जो है मुझको कहना
आज कहने दो
यह मौसम हसीं है तू भी करीब है
जलबे अपने हुस्न के गिराया न करो
जलवों से तेरे
मेरा चंचल मन बहक जाएगा
बहक गया फिर राज खुल जायेगा
तेरे मेरे प्यार के राज को
मन में ही रहने दो
जो है मुझको कहना
आज कहने दो
उजाले यादों के अपनी
साथ मेरे रहने दो
जो है मुझको कहना
आज कहने दो