दुनिया हरजाई लगती है
सारी की सारी लगती है
ख़फ़ा है कौन बेबफ़ा कौनमुझे यह दुनिया में सवाल ही ग़लत लगता है, मुझे तो दुनिया मक्कारी लगती हैसारी की सारी लगती है
अपनापन या दिखावा कोई मालूम कैसे करे मुझे यह समझ नहीं आता, मुझे तो दुनिया कपटाई लगती है सारी को सारी लगती है
फ़रेब की चादर ओढ़े डरे सहमें कहीं उतर न जायें नक़ाब, मुझे तो दुनिया हड़बड़ाई लगती हैसारी की सारी लगती है
अपने अपने मतलब से रिश्ते जोड़ते तोड़ते रहते है यहाँ लोग, मुझे तो दुनियाँ पराई लगती हैसारी की सारी लगती है
मुझे मिला नहीं ख़ुदा कंहीमंदिर मस्जिद क्या मुझेइंसानों में भी दिखा नहीं मुझे तो ख़ुदा की शख़्सियत भी इंसानों की बनाई लगती है
दुनिया भारी लगती हैसारी की सारी लगती है