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माँ की आँख से आंसू आने लगे

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दर्द को जब सीने में छुपाने लगेपिये बिन ही पैर लड़खड़ाने लगे छोटे बच्चे को कमाने जाते देखमाँ की आँख से आंसू आने लगे चले सच की राह में सदा ताकिबाद में शर्म न चेहरे छुपाने लगे  देख कर मेरे तरक्की के कदम लोग सीना अपना जलाने लगे जो दो धूँट पानी भी न पूछते थेआज वो अपना हमें बताने लगे सुन घर वापिस आने की खबरमाँ की आँख से आंसू आने लगे
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