बचपन की यादों की गजल
धूल जमा हो गई थी जिन पुरानी यादों के खाजने मेंबिसर गयी थी कितनी ही बातें जाने और अंजाने में
नजर जब आयी पुरानी एल्बम अलमारी के कोने मेंमेरा दिल फिर से लौट गया बचपन वाले खिलोने में
कुछ देर नजर न आए रोता था घर के किसी कोने मेंडरता था माँ में तेरे सिवा किसी और के साथ सोने में
पापा तुमने मुझे हमेशा सींचा अपने खून व पसीने सेफिर क्यों नही दिखाया और दबा लिया प्यार सीने में
दादा-दादी नाना-नानी वो कंधे तुम्हारे कमजोर हो गएजो कभी मुझे उठाकर घुमाते थे घर के कोने कोने में
जल्दी बड़ा हो जाऊं पैरों पे खड़ा हो पैसे खूब कमाऊंसारा बचपन जो बीता था एक दो रुपये खोने पाने में
नोकरी पैसे की दुनियां ने ऐसा तुमसे साथ तोड़ दियाकी गांव छुड़वा बैठा दिया शहरों में कमरों के कोने में
आज पैसे भी कमा रहे घर मकान भी बनाये जा रहेखलती है तो बस माला पहनी तस्वीरें घर के कोने में
बचपन का वह गौरव जो आज लगता बस ख्वाब साकाश मिल जाये वह भी अलमारी के किसी कोने में
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