गुलाबी कर दो
अंग से आज तन पर रंग लगा दोहल्के हाथों से हाथों को दबा दोरंगीन फजाएँ और गुलाबी सनमदो नजर-ए-तीर के घाव लगा दो
न रंग छुटे तुम ऐसा गुलाबी कर दोआंखों से पिला कर शराबी कर दोपास आओ ओर तुम दूर न जाओसमेट के खुदमें मुझमें जनत भर दो
रंगो की फुहार से तरोताजा कर दोदो जाम साथ पीने का वादा कर दोकरेंगें मिलके धूम-ए-गुल चारों औरपहले बंद दिल का दरवाजा कर लो
मेरे दिल को अपने दिल से जोड़ दोतुम सारे झूठे बन्धन आज तोड़ दोइससे पहले गालियां दे यह मौसमतुम छोड़ शर्म हंसी ठिठौली कर लो
भीगे दामन को सांसो से हवा तो दोरबाब-ओ-चंग में जरा सुर फूंक दोआओ ऐसे लग जाओ गले मेरे आजमेरी शर्म-ओ-हया को पसीना कर दो
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