हाथों में हाथ लिए हम मील चले थे
बरसों के बाद हम जो मिले हैं
दिल में हज़ारों ख़्वाब खिले हैं
नदियाँ, झरने, पहाड़ मैदान
देखा तेरे संग सारा हिंदुस्तान
पर वक़्त फिर जुदाई का आया
दिल में एक तूफ़ान उठ आया
आँखें भर गयीं, दिल भर गया
देखो न ये वक़्त कैसे ठहर गया...
हाथों में हाथ लिए हम मील चले थे
धूप में भी जैसे फूल खिले थे
तेरी हँसी में सुकून ढूँढा था
मैंने इन राहों में अपना जुनून ढूँढा था मैंने
अब वही राहें सूनी लग रही हैं
यादें तेरी सीने में जग रही हैं
मंज़िल आई तो रास्ता बिछड़ गया
देखो न ये वक़्त कैसे ठहर गया...
बिछड़ना लिखा था तो मिले ही क्यों थे?
सूखे चमन में गुल खिले ही क्यों थे?
तू जा रहा है दूर, पर धड़कन यहीं है
मेरे जीने की अब कोई वज़ह नहीं है
आँसुओं ने पलकों पे घर कर लिया
जुदाई के ज़हर को मैंने पी लिया
जो घर बसाया था, वो उजड़ गया
देखो न ये वक़्त कैसे ठहर गया...
बरसों के बाद हम जो मिले थे...
अब फिर वही दूरियाँ, वही सिलसिले हैं...
हाँ, ये वक़्त ठहर गया...