Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)
इक शाम तुझे याद आएंगे
इक शाम तुझे याद आएंगेजब तेरे शहर से चले जाएँगे
माना कि इक भूलहुई थी मुझसेबातें कड़वी तूने भीकही थी मुझसेयह ब...
रंग
बरसा दूँ प्यार कातुझ पर सतरंगी रंगमिटा दूँ रूहों की तन्हाई छू कर तेरा हर इक अंगलगा कर तुझे गले से जोड़ लूँ त...
यादों के संदूक में
यादों के संदूक में यादें तेरी रखी हैतुझको पास बुलाने की सब कोशिशें लिख रखी है।।तेरा लड़ना तेरा झगड़ना रूठना औ...
चाहता तो तू भी है मगर इनकार कर ता है
किस जुर्म की सजा मिलती है उसकोजो चाँद रोज रोज घटता - बढ़ ता है
तुम दूर खींचते हो खुद को जितनातुमसे तालुकात ...
अपनी बाहों में लेलो महक जाएंगे
हमको न छेड़ो हम छलक जाएंगेअपनी बाहों में लेलो महक जाएंगे
रवाँ है बहुत तेरे दिल की धड़कमहक रहा है रात रानी सा ...
दो मुक्तक
रंगने का मज़ा तब है जब ना हो रंग ना हो गुलालइधर हमारे होंठ हो उधर तुम्हारे गालकसके लगा लूतुझे गले अपनेन बाकी...
तू ही बता तुझे कैसे में छोड़ दूं।।
कभी कभी बादल का कोई टुकड़ा आवारा लगता हैकभी कभी मुझको तू ही जीने का सहारा लगता हैऐसे में क्यों न तुझपे अपनी ...
चला गया
उम्र भर बुझाये फिर भी न बुझेवो ऐसी आग लगा कर चला गयाकरता कैसे गुनाह उसका साबित मेंवो सारे सबूत मिटा कर चला ...
दो मुक्तक
है बेख़बर वो अपने खुदा से मगरजी रहे है दूसरों के हाथ देखकरपंडित ओलिया पादरी सब एक हैवे खुश है अपना क़िरदार ...
तो क्या मेरी ख़ता है
मोहब्बत हो गयी है तो क्या मेरी खता हैजो तुझे चाहते है तो क्या मेरी खता है
हिना के साथ जब लिखा साथ नाम त...