चला गया
उम्र भर बुझाये फिर भी न बुझेवो ऐसी आग लगा कर चला गयाकरता कैसे गुनाह उसका साबित मेंवो सारे सबूत मिटा कर चला गया
थकता न था कभी मेरी तारीफ करतेआज वो सो ऐब गिना कर चला गयान जाने क्या क्या रंग दिखाया उसनेरंग लाल पर सफेद लगा कर चला गया
देखे बिना उसको आता नही है करारआंखों को कैसी लत लगा के चला गयाजाने क्या ख्याल आया सफर में उसकोहर तरफ गुबार ही गुबार कर चला गया
मुझे कबूल नही थी दूरी हमारे दरमियानवो पानी में कैसे आग लगा कर चला गयावो जिसके अश्क छुपा के लाये अपने पासहमारे आंसुओं को दरकिनार कर चला गया
उम्मीद कर चुका था नए दौर से जो बहुतएक ज़ख्म देकर यह दौर भी चला गया