हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द दो मुक्तक ✍️ Gourav Baloria · 03 Nov 2021 रंगने का मज़ा तब है जब ना हो रंग ना हो गुलालइधर हमारे होंठ हो उधर तुम्हारे गालकसके लगा लूतुझे गले अपनेन बाकी रह जायेदिल में मलाल हो जाये तेरा दीदारठीक हो जाये दिलमेरा बीमारबदल जाता है हवाओं का मिजाजजब जब गूंजे तेरीपायल की झंकार साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना तू ही बता तुझे कैसे में छोड़ दूं।। अगली रचना → अपनी बाहों में लेलो महक जाएंगे Next