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दो मुक्तक

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रंगने का मज़ा तब है जब ना हो रंग ना हो गुलालइधर हमारे होंठ हो उधर तुम्हारे गालकसके लगा लूतुझे गले अपनेन बाकी रह जायेदिल में मलाल हो जाये तेरा दीदारठीक हो जाये दिलमेरा बीमारबदल जाता है हवाओं का मिजाजजब जब गूंजे तेरीपायल की झंकार
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