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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.

कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)

जो है मुझको कहनाआज कहने दो
उजाले यादों के अपनी साथ मेरे रहने दो जो है मुझको कहना आज कहने दो बार बार पलकें गिराया न करो धूप में निकल के...
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मगर तुमने जो घर उजाड़ा है वो भी तो हमारा है
तुमने कहा की तुम्हारी बर्बादियों में दोष हमारा हैमगर तुमने जो घर उजाड़ा है वो भी तो  हमारा है बात यह नही थी ...
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तुम्हे देख कर तो हम मुस्कुराने लगते है
दोस्ती छोड़ने में कँहा अफ़साने लगते है पर सच्चे दोस्त बनाने में जमाने लगते है तुम मेरे बगैर कंही घूमने न जाया...
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मरे हुए वापिस नही आते
फ़क़त फर्क इतना है मुर्दा दिल हो जाने परसिर्फ तकलीफ होती है मुर्दों को जलाने पर आज अगर खुद ही हाथ बढ़ाने लग जा...
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पिता
*बहुत अच्छी सीख है, कृपया पढ़ियेगा जरूर...*   एक पिता ने अपने पुत्र की बहुत अच्छी तरह से परवरिश की !उसे अच्छ...
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मेरे सर पर तेरा हाथ होता।
जिंदगी तेरा बिनाबहुत भारी हैतेरी जिमेदारियों मुझपेजो आ गयी हैडरता नही था जो तूफानों सेसहम जाता है अबवो झोंक...
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दिल की बात वो समझ लेंगें
जिससे कहना था कह दिया अब वो समझ लेंगें मेरे सफीने में बैठ गए है जो अब वो समझ लेंगे दिल टूटा नही जब तक किताब...
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पहले मिलन के बाद कि जुदाई
तन्हाई में कुछ ऐसे कोसता है अब वह अपना नसीब काश कुछ पल रोक पाता और उसको अपने करीब रोज उसको गले लगा पाता सर ...
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अच्छा था
मैनें रात जो शेर लिखा उसको अच्छा थाउसने खुद फोन पे मुझसे कहा अच्छा था तेरे हुस्न से रंगीन हर शेर मेरी गजल क...
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पापा
गर कभी मिले अकेलापन तो पापा भी रोते है पर सबके सामने आँखों में आँसूं नही होते है कभी उनके  चेहरे की खुशियों...
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