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by Gourav Baloria
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42 poems by Gourav Baloria
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हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है
हर इक नज़ारे म…
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
हर लफ़्ज़ में …
तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है
तेरे साथ रहकर …
घर की पुकार बुलाती है
घर की पुकार बु…
ऐसा भी हो सकता था
ऐसा भी हो सकता…
तुम्हें दिल लगाना भी नहीं आता।
तुम्हें दिल ल…
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