तेरे प्यार के रंग में
हवाएँ चलतीं, तारे चमकते,
चाँद अपनी रोशनी बरसाता
और हम... बस यूँ ही बैठे रहते,
घंटों तक अपने दिल की बातें कहते।
तुम्हें होना चाहिए था मेरे पास
मेरे सीने पर अपना हाथ रखे हुए,
दूसरे हाथ में अपना सिर टिकाए,
गौर से मेरी हर बात सुनते हुए।
मैं भी करवट लेता,
एक हाथ को तकिया बनाता,
और देखता तुम्हारे होठों की वो हल्की मुस्कान
जो मेरी साँसों को भी शब्द दे जाती।
तुम्हारा हाथ अब भी मेरे सीने पर होता,
मैं अपना दूसरा हाथ उस पर रखता,
और फिर बस… झांकता तुम्हारी आँखों में
जैसे उनकी गहराई में कोई और दुनिया बसी हो।
फिर तुम धीरे-धीरे अपने होंठ लातीं,
मेरे होंठों के करीब
और मैं…
मैं बस रंग जाता…
तेरे प्यार के रंग में।