फासलों में कुर्बत यह मसला क्यों है
तेरे मेरे दरमियां यह फासला क्यों हैफासलों में कुर्बत यह मसला क्यों है
जब खुद को तुम्हारा किया तो कियातुम हो जाओ मेरे यह बदला क्यों है
कभी मिले नही एक दूसरे से ताउम्रमेरी गलियों में तेरा काफिला क्यों है
मशरूफ रहता हूँ हमेशा इल्तिज़ा में दरगाहों में चेहरा तेरा दिखता क्यों है
जर्रे जर्रे पे मेरे बस हक़ है तेरा ही तेरातो मौत के लिए खुदा से वास्ता क्यों है
कुछ भी नही बदला तेरे आने से यंहाजाने अब मेरी रातों मे उजाला क्यों है
अगर इश्क़ करना इबादत है खुदा कीफिर इश्क़ में भला-बुरा भला क्यों है
आरजू है समेट लूं तुझे अपनी बाहों में पर हमारे दरमियां यह फासला क्यों है