कोई तो जवाब होगा।
तेरी ख़ामोशियों का भी कोई तो जवाब होगा,
मेरे सवालों का तुझमें कोई तो जवाब होगा,
जो हक़ जताकर तुम मेरी रूह में उतर आए,
बेवफ़ा उस दावे का कोई तो जवाब होगा।
मैंने सज्दों में तुम्हें माँगा था उम्र भर के लिए,
उस दुआ के टूटने का कोई तो जवाब होगा।
मेरे हिस्से की फ़ज़ा में जो उदासी ठहर गई,
तेरे रंगों के बदलने का कोई तो जवाब होगा।
दिल की जागीर तेरे नाम लिखकर भूल गया,
मेरी वसीयत के मिटने का कोई तो जवाब होगा।
जो हसरतें तेरे नग़्मों से फिर सँवरने लगी थीं,
उनके ख़ामोश होने का कोई तो जवाब होगा।
हिज्र की बात न कर, रात अभी बाक़ी है,
इस धड़कते हुए दिल का कोई तो जवाब होगा।
तेरे और मेरे दरमियाँ जो लकीर खिंच गई,
उस फ़ासले के मुक़द्दर का कोई तो जवाब होगा।