देखी नर्मदा की धारा देखी, देखा भेडा का घाट
देखी नर्मदा की धारा देखी, देखा भेडा का घाटदेखी रात भर पंडाल-चौकी, देखा देवी का ठाठ
टेडी मेडी बहती नर्मदा, जैसे चलता कोई साँपऊँची ऊँची सीना ताने, खड़ी चटाने यहाँ सपाट
छोटी छोटी गालियाँ, बसते उसमें यहाँ के लोगलेकर अपनी आशाएँ, खेरमाई का दर रहे पाट
धुँआ धुँआ सा धुँधाधार का गिरता जहाँ पानीउसी किनारे बैठे बूढ़ी बाई, खूब बेर रही है चाट
मदन महल की पहाड़ी से, दिखता है शहर साराक्या बंदर कूदनी में बंदर चटानों को रहा है टाप
चारों धर्मों की बाहर, धूम धाम से मनाते त्योहारजबलपुर है नाम, संस्कार धाम भी बुलाया जात