हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria

तेरी आँखों के समंदर में जब डूब जाये

·
मुझसे मेरी होश सुध-बुध सब खो जाये अगर तू मेरी बाहों में आके सिमट जाये आग दुनिया की लगी हुई भी बुझ जाये तेरी आँखों के समंदर में जब डूब जाये एक पत्थर की तक़दीर भी संवर जाये जो एक बार पत्थर ताजमहल बन जाये मुज़्महिल लगते यंहा सब आईने मुझे आँखों को दीदार जब भी तेरा हो जाये बंद जब भी दिल के झरोखे करने जाये हर बार तू मेरी गली से क्यों गुजर जाये खुशबु की तरह बसा लूंगा तुझे में अंदर तू फूलों की तरह जो मुझपे बिखर जाये गरज है तेरे जर्रे जर्रे पे फ़िदा हुआ जाये इश्क़ की आजिज़ी में संदल बना जाये अपनी हर एक सांस तुझे सौंपता जाऊँ जब मेरे सीने पर सर रख तू सो जाये ख़्वाब ही ख़्वाब की ताबीर हुआ जाये ख़्वाबों की ताबीर क्यों तुझसे की जाये दहक उठते है मेरे सारे के सारे ख्वाब जब जब मुझ पर तेरा साया पड़ जाये दुनिया ख़ुश्बू शबनम रंगीन बन जाये चेहरा चाँद बदन चांदनी सा बन जाये मेरे दिल का हर एक शोला बुझ जाये घटा बनकर जो तू मुझपे बरस जाये
साझा करें · Share