चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
न करेंगे रुख़ इधर उधर अपना चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए एक दिन भीगेंगे बरसात में दोनों चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
हमने जिस राह को छोड़ा उसे छोड़ा फिर उधर चाहे ज़माना जाएदेखेंगे तो सिर्फ़ राह देखेंगे तेरी चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
आँगन में रखूँगा दीप जला कर साया बन तुम दरवाज़े पर आना बुझने न दूंगा चिराग़ महोब्बत का चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
जब तुम आओगे तो ऐसा होगा तुम सोच न पाओगे कैसा होगातेरे ख़यालों में सिर्फ़ में रहूँगा चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
साथ जीने मरने की मेरी सारी तम्मनायें बस तेरे लिये ही रहीरोक न पाएँगे दुनियाँ के रिवाज चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए