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आज कल से ज़्यादा चाहने लगे हैं

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रोज़ थोड़ा-२ और पास आने लगे हैंआज कल  से ज़्यादा  चाहने लगे हैं जब सलीक़े से वो मेरे शाने से लगामेरी आँखों से भी आँसू आने लगे हैं उनका कहना है महोब्बत है मुझसेमगर यह बतलाने में जमाने लगे है  अज़ाँ होने लगी मेहरबाँ मुझ पे अबउसे देख कर शेर याद आने लगे हैं कुछ नये रिश्ते मेरे क़रीब आते देखपुराने रिश्ते दूर मुझसे जाने लगे है उसके लिए बनवाऊँगा ताजमहलइसी बात पर सोलहों आने लगे हैं
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