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Ramdhari Singh 'Dinkar'
Ramdhari Singh 'Dinkar'
Modern Era (Adhunik Kaal) / Chhayavad and Pragativad (Progressivism)  ·  प्रोफ़ाइल देखें →

कलम और तलवार

दो में से क्या तुम्हें चाहिये कलम या कि तलवार? मन में ऊँचे भाव कि तन में शक्ति विजय अपार? अंधकक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान? या कि जीतोगे लहू बहाकर तुम जग का मैदान? कलम देश की बड़ी शक्ति है भाव जगाने वाली, दिल ही नहीं, दिमागों में भी आग लगाने वाली। पैदा करती कलम विचारो के जलते अंगारे, और प्रज्वलित प्राण देश क्या कभी हार सकता है? किन्तु, वहां क्या जहाँ निर्भय हो रहे हों अत्याचार, क्या करेगी कलम वहां? क्या करेगी वहां पुकार? वहां उठेगी नहीं जहाँ लहू की धार बहेगी, सिर्फ अहिंसा की बातें क्या वहां पर सुरक्षित रहेंगी? जहां पालते लोग लहू में हलाहल की चिंगारी, वहां चाहिए हमें हाथ में एक तीखी तलवार करारी। कलम हाथ में, एक हाथ में हो तलवार हमारी, दोनों मिलकर करें देश की रक्षा की तैयारी।

यह कविता 'कलम' (वैचारिक क्रांति और ज्ञान) और 'तलवार' (शारीरिक शक्ति और आत्मरक्षा) के बीच के संतुलन को दर्शाती है। कवि स्पष्ट करते हैं कि जहाँ कलम विचारों की अग्नि से समाज को जाग्रत करती है, वहीं अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध भौतिक रक्षा के लिए तलवार भी अनिवार्य है। अंततः, राष्ट्र की पूर्ण सुरक्षा और प्रगति के लिए वैचारिक शक्ति और सैन्य बल दोनों का सह-अस्तित्व आवश्यक है।
This poem depicts the balance between the 'pen' (ideological revolution and knowledge) and the 'sword' (physical strength and self-defense). The poet clarifies that while the pen awakens society with the fire of thoughts, the sword is also essential for physical defense against injustice and tyranny. Ultimately, the co-existence of both intellectual power and military strength is necessary for the complete security and progress of a nation.
Ramdhari Singh 'Dinkar'
रचनाकार
Ramdhari Singh 'Dinkar'
Modern Era (Adhunik Kaal) / Chhayavad and Pragativad (Progressivism)
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