Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)
हर पल साथ साथ हम
ना थमे, ना बिछड़े, चले उम्र भर के साथ हम।
तेरी हँसी में ढूँढते रहे अपनी हर बात हम।
भटके नहीं कहीं भी, बस रह...
बातें है दिल कि
दिल की तह, में खोये पल, बातें है दिल कि
सपनों की अंजुमन में, बस रहा है मेरा मनचाहत है तेरी, आरज़ू है तेरी, ...
मेरा गाँव भी डूब गया इनकी नफ़रत की बातों में
आज कल से ज़्यादा चाहने लगे हैं
रोज़ थोड़ा-२ और पास आने लगे हैंआज कल से ज़्यादा चाहने लगे हैं
जब सलीक़े से वो मेरे शाने से लगामेरी आँखों ...
जवानों की शहादत का भी मजाक बनाया है
क्यों लड़ते हो आज आजादी किसने दिलाई थीक्यों पूछते हो गोली किसने खाई थीचाहे वह थे महात्मागांधी, या शहिद भगतदे...
राम भक्त
यहाँ वहाँ से सुन सुन कर कुछ कुछ चुन लाता हूँसिया राम कुल का वारिस इक कथा आपको सुनाता हूँ
आज राम भक्त जो बने...
कभी जब तुम से मुलाक़ात होगी
कभी जब तुम से मुलाक़ात होगीबड़े प्यार से प्यार की बात होगी
चाँद हो रहा होगा रोशन छत परऔर धूप चोखट पे ढल रह...
चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए
न करेंगे रुख़ इधर उधर अपना चाहे दुनिया इधर-उधर हो जाए एक दिन भीगेंगे बरसात में दोनों चाहे दुनिया इधर-उधर हो...
मुक्तक
हवा खुश गवार हैगुलों पे निखार हैन जाम रोक साक़ीपिलाए जा पिलाए जाजिगर में आग लगा देतेरी नज़रों का जामअभी में...
जिंदगी कहां इतनी आसान
अब रुक जाता हूँ कुछ करने से पहले सोचने लगता हूँ कुछ कहने से पहलेठोकरें खाकर अबसंभलने लगा हूँचार दिन की ज़िं...