Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)
उसके शहर न मेरा नाम था न मेरा मकान न था
चोट तुम्हें इतनी लगेगी अंदाजा नही थातुमको भी तो गलती का पछतावा न थाहम हर पल तुम्हें खुद को समझाते रहेजबकि द...
मुझे अपने संग ले जाना
जब में आँसू बन जाऊंपास मेरे तुम आनाथाम के अपने हाथोंमुझे अपने संग ले जाना
पल पल दिल मेरा धड़केपास मेरे तुम आ...
बोते सज्जन बनान दी भी लोड नही
बोते सज्जन बनान दी कोई होड़ नहीदुश्मणा दा बुरा करण दी कोई लोड नहीतू तां सीधा साधा बन्दा ओ रब दाजो दिल च नी ह...
दिल की बात दिल से हू-ब-हू कर ले
आ मिल कर आज फिर कोई गुफ़्तगू कर ले,
जो रह गई थी अधूरी पूरी वो आरज़ू कर ले।
मैं दफ़्न कर चुका था अपनी रू...
सब कुछ है मेरे पास फिर भी, लुटा हुआ हूँ
अंदर ही अंदर में कंही खुद में, घुटा हुआ हूँसब कुछ है मेरे पास फिर भी, लुटा हुआ हूँ
सकूँ नही है शहरों की भीड़...
सुरमें में सुर्ख आंखे ख़ंजर से कम नही
तेरा मेरे संग होना खजाने से कम नहीसुरमें में सुर्ख आंखे ख़ंजर से कम नही
बात तो बेबजह शुरू हो गयी थी तुमसेमगर...
यह सही है या यह गलत है
यह सही है या यह गलत है सही क्या, कौन तय करेगा
उनको लगता वह जो बोले उनको लगता वह जो करे
उनका सोचना ही ला...
सियाह-ए-रात में आसां भी पेचीदा हो जाता है
क्यों पूछते हो की क्यों तकते हो चाँद रात भरजब मालूम है चाँद में अक्स तेरा नजर आता है
यकायक से तेज हो जाती ...
बचपन की यादों की गजल
धूल जमा हो गई थी जिन पुरानी यादों के खाजने मेंबिसर गयी थी कितनी ही बातें जाने और अंजाने में
नजर जब आयी पुरा...
हिमाचली धाम
"हिमाचली धाम" हिमाचल प्रदेश की खाद संस्कृति में पारंपरिक खाद्य परिक्रिया है। पारंपरिक अवसरों जैसे शादी आदि ...