Anjum Rehbar
Contemporary (Late 20th century – Present) · प्रोफ़ाइल देखें →
तेरा वादा ना पूरा हुआ
तेरा वादा ना पूरा हुआ, शाम से फिर सहर हो गई मुझको खिड़की पे बैठे हुए, आज भी रात भर हो गई। दो दिलो को जुदा कर गई एक परदेस की नौकरी वो भी पागल उधर हो गया, मैं भी पागल इधर हो गई। घर के लोगों को हर बात का,तेरी मेरी मुलाक़ात का, पायलों से पता चल गया, चूड़ियों से खबर हो गई। तन में बिजली सी लहराई थी , याद किसकी थी क्यों आई थी चलते चलते ये ठंडी हवा, क्यों पसीने में तर हो गई।
हिंदी भावार्थ
यह कविता विरह, प्रतीक्षा और प्रेम की गहन अनुभूतियों को दर्शाती है, जहाँ एक प्रेमिका अपने प्रियतम के अधूरे वादे के कारण रात भर खिड़की पर बैठकर उसका इंतजार करती है। परदेस की नौकरी के कारण उपजी दूरी दोनों प्रेमियों को व्याकुल कर देती है, और उनकी गुप्त मुलाकातों की गूंज घर के लोगों तक पहुँच जाती है। अंततः, प्रियतम की यादें मन में एक ऐसी सिहरन पैदा करती हैं जो ठंडी हवा में भी बेचैनी और पसीने का अहसास करा देती हैं।
English Translation
This poem depicts the deep emotions of separation, waiting, and love, where a beloved spends the entire night by the window waiting due to her lover's unfulfilled promise. The distance caused by a job abroad drives both lovers to madness, and the subtle sounds of her ornaments reveal their secret meetings to the family. Ultimately, the sudden rush of his memory creates such an intense sensation that even a cool breeze leaves her anxious and drenched in sweat.