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अंजुम रहबर जी के कुछ बेहद लोकप्रिय और बेहतरीन मुक्तक

यह किसी धाम का नहीं होता, यह किसी नाम का नहीं होता। प्यार में जब तलक नहीं टूटे, दिल किसी काम का नहीं होता। _____________________ मजबूरियों के नाम पर सब छोड़ना पड़ा, दिल तोड़ना कठिन था मगर तोड़ना पड़ा। मेरी पसंद और थी सब की पसंद और, इतनी ज़रा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा। _____________________ इतने करीब आ के सदा दे गया मुझे, मैं बुझ रही थी कोई हवा दे गया मुझे। मांगा था मैंने ज़हर, दवा दे गया मुझे, उसने भी खाक डाल दी अंजुम की कब्र पर, वो भी मोहब्बत का सिला दे गया मुझे। _____________________ खामोश हैं लब, चुप है नज़र, याद नहीं है, कुछ आपसे कहना है मगर याद नहीं है। अब वो मेरी तस्वीर का दीवाना बना है, कहता था मुझे कोई हुनर याद नहीं है। _____________________ होंठों की भी क्या मजबूरी रहती है, सब कुछ कहकर बात अधूरी रहती है। उससे मिलकर अंजुम ये एहसास हुआ, कुर्बत में भी कितनी दूरी रहती है।

अंजुम रहबर के ये मुक्तक प्रेम की गहरी पीड़ा, विरह और मानवीय संवेदनाओं को खूबसूरती से दर्शाते हैं। इनमें समाज के दबाव में टूटे रिश्तों, अधूरे संवादों और निकटता में भी महसूस होने वाली दूरी का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। कवयित्री ने दिल टूटने को प्रेम की पूर्णता और परिपक्वता का एक अनिवार्य हिस्सा माना है।
These couplets by Anjum Rahbar beautifully depict the deep pain of love, separation, and human emotions. They poignantly portray relationships broken under societal pressure, incomplete conversations, and the distance felt even in close proximity. The poetess views heartbreak as an essential part of the fulfillment and maturity of love.
Anjum Rehbar
रचनाकार
Anjum Rehbar
Contemporary (Late 20th century – Present)
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