Anjum Rehbar
Contemporary (Late 20th century – Present) · प्रोफ़ाइल देखें →
सोचती हूँ प्यार करना चाहिए
रंग इस मौसम में भरना चाहिए सोचती हूँ प्यार करना चाहिए ज़िंदगी को ज़िंदगी के वास्ते रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए दोस्ती से तजरबा ये हो गया दुश्मनों से प्यार करना चाहिए प्यार का इक़रार दिल में हो मगर कोई पूछे तो मुकरना चाहिए एक गमले में रहकर कटे जिंदगी हर जगह गुल खिलाना नहीं चाहिए
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम, जीवन के विरोधाभासों और मानवीय संबंधों की गहरी समझ को दर्शाती है। कवयित्री जीवन में प्रेम के रंगों को भरने की वकालत करती हैं, जहाँ वे दोस्ती के कड़वे अनुभवों के बाद दुश्मनों से भी प्रेम करने और प्रेम की पवित्रता को छुपाकर रखने की बात कहती हैं। अंततः, यह कविता जीवन को बिखरने से बचाकर एक ही स्थान पर निष्ठापूर्वक और मर्यादित होकर जीने का संदेश देती है।
English Translation
This poem reflects on love, life's contradictions, and the depth of human relationships. The poet advocates for filling life with the colors of love, suggesting that bitter experiences in friendship teach us to love even our enemies, while keeping the sanctity of love private. Ultimately, it conveys a message of loyalty and restraint, advising one to live a focused, dignified life rather than scattering one's emotions everywhere.