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प्यार के कटोरे में गंगा का पानी

By Manjar Bhopali

तुम भी पियो, हम भी पियें, रब की मेहरबानी... प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... तुमने भी सवांरी है, हमने भी सवांरी है. ये ज़मीन तुमारी है, ये ज़मीन हमारी है.. होलिओं के रंगों-सी, ईद की सेवैओं-सी मंदिरों के फूलों-सी, सुबहों की अज़ानों-सी इस ज़मीन पर लिखनी है प्यार की कहानी प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... धर्म जो तुम्हारा है, धर्म जो हमारा है धर्म सबका प्यारा है, बस भ्रम ने मारा है धर्म पर झगरते हैं, धर्म पर जो लड़ते हैं अपनी इस बुराई से, अपनी इस लड़ाई से शर्म से न हो जाये धर्म पानी-पानी प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... कश्मीर वाले हो, दिल्ली के उजियाले हो, यू.पी के हो मतवाले या बिहार के पाले गीत गाते गुजरती बन के सब रहें साथी कोई धर्म वाले हो, गोर हो या काले हों जात हम सब की है हिन्दुस्तानी प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... आफ़ताब किसका है? माहताब किसका है? माहताब सबका है , आफ़ताब सबका है.. ये हवायें किसकी हैं? ये घटाये किसकी हैं? ये घटाये सबकी है, ये हवाएं सबकी है किस तरह से बाटेंगे ये रब की मेहरबानी ? प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... किस तरह से बाटेंगे ये रब की मेहरबानी ? प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... तुम भी पियो, हम भी पियें, रब की मेहरबानी... प्यार के कटोरे में गंगा का पानी... प्यार के कटोरे में गंगा का पानी...

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