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Manjar Bhopali
Manjar Bhopali
1970-Present  ·  प्रोफ़ाइल देखें →

वो कहीं तो मिले, वो कभी तो मिले

वो कहीं तो मिले, वो कभी तो मिले ख्वाब में ही सही जिंदगी तो मिले दिल में आने की हसरत बहुत दिन से है कुछ इज़ाजत मगर आपकी भी तो मिले जिंदगी काट देंगे गली में तेरी जानेमन हमको तेरी गली तो मिले हम भी कह देंगे घर में बहार आई है कोई डाली चमन में हरी तो मिले मुझको रावण ही रावण मिले हैं मगर जिंदगी में कभी राम भी तो मिलें.

यह कविता मानवीय जीवन में प्रेम, आशा और आदर्श की गहरी खोज को दर्शाती है। कवि अपने प्रियतम, खुशियों और जीवन की सार्थकता को पाने के लिए व्याकुल है, जहाँ वह बुराई और निराशा के बीच अच्छाई (राम) और नवजीवन (बहार) की तलाश कर रहा है। यह अधूरी हसरतों के बीच उम्मीद की लौ जलाए रखने की एक भावुक अभिव्यक्ति है।
This poem reflects a deep human quest for love, hope, and ideals in life. The poet expresses a restless yearning to find their beloved, happiness, and ultimate purpose, searching for goodness (Rama) and renewal (spring) amidst negativity and despair. It is a poignant expression of keeping the flame of hope alive amidst unfulfilled desires.
Manjar Bhopali
रचनाकार
Manjar Bhopali
1970-Present
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