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रहा तेरा ग़म अमानत थी मुझे में ही कमी

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जो गुजर नहीं रही है वो राह ले रहे हैचाह थी जो तेरी अब वो राह ले रहे है जो चल दिया हूँ अब देखूँ न लौट केले जाये दूर तुझ से वो राह ले रहे है इक आग सी लगी है अब मेरे सीने में उस आग की रोशनी से राह ले रहे है  ख़ामोश ज़िंदगी भी दलील-ए-बाहर हैदिख जाये जब खामोशी वो राह ले रहे है रहा तेरा ग़म अमानत थी मुझेमें ही कमीकमी जहां न खले तेरी वो राह ले रहे है
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