महान कवि एवं साहित्यकार
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"हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है"
डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है"
Akbar Allahabadi
प्रसिद्ध कवि व रचनाकार
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"अज्ज आक्खां वारिस शाह नूं किते क़बरां बिच्चों बोल
ते अज्ज किताबे-इश्क दा कोई अगला वरका खोल…।"
ते अज्ज किताबे-इश्क दा कोई अगला वरका खोल…।"
Amrita Pritam
प्रसिद्ध कवि व रचनाकार
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"प्यार नज़रों में आना नहीं चाहिए
रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए"
रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए"
Anjum Rehbar
Contemporary (Late 20th century – Present)
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"रख दिए तुमने नज़र में बादलों को साध कर,
आज माथे पर, सरल संगीत से निर्मित अधर,"
आज माथे पर, सरल संगीत से निर्मित अधर,"
Dharmveer Bharati
Modern Hindi Literature (Post-Independence era)
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"ऐ चाँद, कुछ देर में तुझे घने बादल ढक लेंगे,
बालकनी में बैठे-बैठे हम भी आँखें ढक लेंगे।"
बालकनी में बैठे-बैठे हम भी आँखें ढक लेंगे।"
Gourav Baloria
Contemporary
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"दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई"
जैसे एहसाँ उतारता है कोई"
Gulzar
Modern Era
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"उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या
दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या"
दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या"
Jaun Elia
प्रसिद्ध कवि व रचनाकार
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"फिर मिरी याद आ रही होगी
फिर वो दीपक बुझा रही होगी"
फिर वो दीपक बुझा रही होगी"
Kumar Vishwas
Contemporary (Late 20th century – Present)
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"मुझको अपने बैंक की किताब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए"
देश की तबाही का हिसाब दीजिए"
Manjar Bhopali
1970-Present
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"हस्ती अपनी हबाब की सी है
ये नुमाइश सराब की सी है"
ये नुमाइश सराब की सी है"
Mir Muhammad Taqi
18th Century / Mughal Era
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"हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले"
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले"
Mirza Ghalib
Late Mughal Era
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"याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन
अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन"
अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन"
Pramod Tiwari
Late 20th Century – Present
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"मेरे नगपति! मेरे विशाल!
साकार दिव्य गौरव विराट,"
साकार दिव्य गौरव विराट,"
Ramdhari Singh 'Dinkar'
Modern Era (Adhunik Kaal) / Chhayavad and Pragativad (Progressivism)
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"कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया"
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया"
Sahir Ludhianvi
प्रसिद्ध कवि व रचनाकार
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"चल हंसा वा देस, जहाँ पिया बसत हैं
भूल गयो है अपनो देस, जहाँ पिया बसत हैं"
भूल गयो है अपनो देस, जहाँ पिया बसत हैं"
Sant Kabir Das
15th Century (Late Medieval India / Bhakti Movement era)
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"क्या यह जरूरी है कि मेरे हाथों में
अनाज या सोने या परिधानों के महंगे उपहार हों?"
अनाज या सोने या परिधानों के महंगे उपहार हों?"
Sarojini Naidu
Indian Renaissance / British Era (1879-1949)