महान कवि एवं साहित्यकार
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"प्यार नज़रों में आना नहीं चाहिए
रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए"
रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए"
Anjum Rehbar
Contemporary (Late 20th century – Present)
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"रख दिए तुमने नज़र में बादलों को साध कर,
आज माथे पर, सरल संगीत से निर्मित अधर,"
आज माथे पर, सरल संगीत से निर्मित अधर,"
Dharmveer Bharati
Modern Hindi Literature (Post-Independence era)
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"दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई"
जैसे एहसाँ उतारता है कोई"
Gulzar
Modern Era
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"फिर मिरी याद आ रही होगी
फिर वो दीपक बुझा रही होगी"
फिर वो दीपक बुझा रही होगी"
Kumar Vishwas
Contemporary (Late 20th century – Present)
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"याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन
अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन"
अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन"
Pramod Tiwari
Late 20th Century – Present
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"मेरे नगपति! मेरे विशाल!
साकार दिव्य गौरव विराट,"
साकार दिव्य गौरव विराट,"
Ramdhari Singh 'Dinkar'
Modern Era (Adhunik Kaal) / Chhayavad and Pragativad (Progressivism)