कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (2)

तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो
तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो मैं तुम्हारे ही दम से ज़िंदा हूँ मर ही जाऊँ ...
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उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या मेरी हर बात बे-असर ही रही नुक़्स है ...
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