गुड़ियों वाले दिन
याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड़ियों वाले दिन अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन के आला गाते बाबा की खंजड़ियों वाले दिन आला गाते बाबा की खंजड़ियों वाले दिन बात में फूट रही फुल झड़ियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे उड़ियों वाले दिन अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन पनवाड़ी की चढ़ी उधारी घूमे मस्त निठल्ले पनवाड़ी की चढ़ी उधारी घूमे मस्त निठल्ले कोई मेला हट ना छूटे टका नहीं है पल्ले पनवाड़ी की चढ़ी उधारी घूमे मस्त निठल्ले कोई मेला हट ना छूटे टका नहीं है पल्ले कॉलर खड़े किए हाथों में घड़ियों वाले दिन कॉलर खड़े किए हाथों में घड़ियों वाले दिन अरे ट्रांजिस्टर पर हवा महल की कड़ियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन औ लिख के लिख लिख पढ़ पढ़ चूमे फाडे बिना नाम की चिट्ठी औ लिख के लिख लिख पढ़ पढ़ चूमे फाडे बिना नाम की चिट्ठी सुबह दोपहरी शाम उसी की बातें खट्टी मिट्टी। रुमालों में फूलों की पंखुड़ियों वाले दिन रुमालों में फूलों की पंखुड़ियों वाले दिन रुमालों में फूलों की पंखुड़ियों वाले दिन अरे हड़बड़ियों में बार-बार गड़बड़ियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन अरे दस पैसे में दो चून की पुड़ियों वाले दिन तेज धार करती बन्जारन चक्का खूब घुमावै, तेज धार करती बन्जारन चक्का खूब घुमावै, दाव दांत के बीच कटारी मंद-मंद मुस्कावै पूरा गली मोहल्ला घायल छुरियों वाले दिन, पूरा गली मोहल्ला घायल छुरियों वाले दिन, छुरियों-छुरियों छूट रही छुरछुरियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन घर भीतर मनिहार चढ़ावै, चुड़ियां कसी कसी सी घर भीतर मनिहार चढ़ावै, चुड़ियां कसी कसी सी पास खड़े भइया मुस्कावैं, भउजी फंसी फंसी सी घर भीतर मनिहार चढ़ावै, चुड़ियां कसी कसी सी पास खड़े भइया मुस्कावैं, भउजी फंसी फंसी सी देहरी पर निगरानी करती बुढ़ियों वाले दिन, देहरी पर निगरानी करती बुढ़ियों वाले दिन, बाहर लाठी, मूछों और पगड़ियो वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन शोले देख छुपा है बीरू दरवाजे के पीछे, शोले देख छुपा है बीरू दरवाजे के पीछे, चाचा ढूंढ रहे हैं बटुआ फिर तकिया के नीचे चाची देख छुपाती घूमै छड़ियों वाले दिन, हल्दी गर्म दूध के संग फिटकरियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन ये वो दिन थे जब हम लोफर आवारा कहलाए, तो ये वो दिन थे जब हम लोफर आवारा कहलाए, इससे ज्यादा इस जीवन में कुछ भी कमा न पाए महंगाई में फिर से वो मंदड़ियों वाले दिन, अरे कोई लौटा दे मेरे चूरन की पुड़ियों वाले दिन याद बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन