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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.

कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)

बस एक तेरा दिया गुलाब था, जो सूखकर भी महकता रहा
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इश्क़ जब मुकम्मल हुआ, बस राम-राम हो गया।
उस एक लम्हे में ही मेरा चारधाम हो गया
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यह शेर सिर्फ़, मक़्ता ही नहीं, बातें है दिल कि
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जायें चाहें जहां भी मिल जायें साथ हम
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बेटी को देवी कहने वाले देश में कमाल हो रहा है
           
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तेरे प्यार के रंग में
हवाएँ चलतीं, तारे चमकते, चाँद अपनी रोशनी बरसाता और हम... बस यूँ ही बैठे रहते, घंटों तक अपने दिल की बातें कह...
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जब चलता है तू हाथ पकड़ कर मेरा
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चुनाव
अब चुनाव आ रहा है कलाकारियाँ देखने को मिलेंगी जब चुनाव हो जाएगा मक्कारियाँ देखने को मिलेंगी चुनाव प्रचार से...
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मेरे मन की ख़ुशबू है
कुछ तेरा ही भी हिस्सा है।
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मुलाक़ात हो गई
कभी लगा था खो जाओगे, भीड़ में किसी मोड़ पर,भीड़ में तुम्हारी मुस्कान दिखी मुलाक़ात हो गई।बोल न पाया,
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