Ghazal
shringara
तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
दूरियों का बढ़ जाना तेरे बिना सांसो का आना
तेरी इबादत बगैर जिये जाना अच्छा नही लगता
तेरा एक पल को आना पल मे ओझल हो जाना
तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
मेरा तेरा ख्वाव सजाना फिर उसका टूट जाना
मेरा आँसू छुपा के मुस्कुराना अच्छा नही लगता
तेरा पुतलियों को घूमना, फिर पलकों से छुपाना
झुका कर पलकें नहीं उठाना, अच्छा नही लगता
वादा करके तेरा नहीं आने का हर एक बहाना
यूँ ही मौसमों का गुजर जाना अच्छा नही लगता
तेरा रोज संवर कर सपनों में आकर मुझे जगाना
फ़िर मेरी नींद का टूट जाना अच्छा नही लगता
बस अच्छा लगता है तो तेरा प्यार से मुझे बुलाना,
मेरे गालों पर हाथ लगाना बालों में हाथ घुमाना
और तेरा मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाना