Ghazal shringara

तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है

तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है
मैंने जो चाहा था तुझ पर ही सब लुटा दिया तुमने भी अपना हर ख़्वाब मुझ पर ही लुटा दिया राहों में डर था और अंधेरा हर मोड़ पर तुमने उसी राह पर उजाला लुटा दिया चुप सा ही रहता था, कुछ भी कह पाता न था तुमने मेरी ख़ामोशी को लफ़्ज़ों में लुटा दिया तेरे साथ रहकर बदलने लगा हूँ मैं मैंने भी खुद को तुझपे हँसकर ही लुटा दिया टूटे गए सब ख़्वाब, जब कुछ न बचा तुमने तब अपना सब मुझ पे लुटा दिया तुम जो मिले मुझको तो अपना सा लग गया वरना इस जहाँ ने मुझको बारहा लुटा दिया कैसे अदा हो शुक्रिया, ये समझ आता नहीं तूने “गौरव” को खुद से बढ़कर ही लुटा दिया