Love

तुम्हें दिल लगाना भी नहीं आता।

Gourav Baloria — poet profile photo Gourav Baloria · Hindi
तुम्हें  दिल लगाना भी नहीं आता। by Gourav Baloria — cover image
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Editorial Context

A heartfelt Hindi love poem by Gourav Baloria about unrequited feelings and the art of falling in love. Read this emotional shayari on Verse & Books.

छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता। ये कैसा सितम है सनम, कि दिल दुखाना भी नहीं आता, और दिल लगाना भी नहीं आता। निगाहों में मचलती हैं, हज़ारों अनकही बातें, मगर होंठों तक उनको, ले के आना भी नहीं आता। भँवर में छोड़ रखी है, मेरी कश्ती मोहब्बत की, बचाना भी नहीं आता, डुबाना भी नहीं आता। हमें तुमसे मोहब्बत है, भला कैसे कहें तुमसे, तुम्हें तो मेरी खामोशी, समझ पाना भी नहीं आता। उलझ कर रह गए हैं हम, तेरी इन्हीं अदाओं में, गले लगना नहीं आता, और छोड़ जाना भी नहीं आता।