Sad

ऐसा भी हो सकता था

Gourav Baloria — poet profile photo Gourav Baloria · Hindi
ऐसा भी हो सकता था by Gourav Baloria — cover image
format_quote

Editorial Context

A deeply moving sad poem in Hindi by Gourav Baloria reflecting on what could have been. Explore the best emotional and heartbreak poetry on Verse & Books.

तुम कहते हो मिल न पाए, बंधन तो तुमने डाले थे। तुम खुद वो दीवार गिराते, ऐसा भी हो सकता था। दुनिया की बातों में आकर, तुमने मुझसे दूरी की। दुनिया की तुम फिक्र न करते, ऐसा भी हो सकता था। अपने भरे-भरे आंगन में, तुम तो पहले से निहाल थे। कुछ मेरे भी ख्वाब सजाते, ऐसा भी हो सकता था। तेरी खुशी में खुशी मेरी, इसलिए लब सियें है मैंने। बिना कहे तुम दर्द समझते, ऐसा भी हो सकता था। अब जो चोरी-छिपे मिलते हैं, एक डर सा दिल में रहता है। बिना खौफ के बांह फैलाते, ऐसा भी हो सकता था। बंद कमरे में छुपके रोते हो, अपनी मजबूरी पे पछताते हो। वक़्त रहते अगर कदम उठाते, ऐसा भी हो सकता था। महफ़िल में जब टकराते हैं, अनजान बनके गुज़र जाते हैं। मेरा हाथ पकड़ तुम रुक जाते, ऐसा भी हो सकता था। मुझसे नज़रें अब चुराते हो, अपना दर्द छुपाते फिरते हो। एक बार सीने से लग जाते, ऐसा भी हो सकता था। मैं चुपचाप पीछे हट गया, अपना प्यार कुर्बान किया। मेरी खातिर तुम रुक जाते, ऐसा भी हो सकता था। मैंने दे दीं बस दुआएं तुझको, और दिल में तुझे बसा लिया। हम दोनों अपना जहां बसाते, ऐसा भी हो सकता था।