shringara
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
तेरी आवाज़ में जैसे शाम ढलती जाती है
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
तेरे होने से दिल में रोशनी सी पलती जाती है
तेरे जाने से जान निकलती जाती है
तेरे बिन ये ज़िंदगी बस यूँ ही चलती जाती है
तेरी आस में मेरी साँस अटकती जाती है
जब तू नहीं तो हर खुशी भी खलती जाती है
दूर रहकर तुझसे आग भड़कती जाती है