Love
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है
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Editorial Context
A deeply romantic Hindi poem by Gourav Baloria about keeping the image of a beloved in the chambers of the heart — a beautiful metaphor for undying love.
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है
तुमने तो दिलों के बीच इक लकीर बना ली है
न पूछो क्या मेरी हस्ती उसने जागीर बना ली है
फ़ना को अपनी मैंने शाने की तासीर बना ली है
जब थी राह अंधियारी, मैंने इक तनवीर दिखला दी
उसने इक मुट्ठी ज़मीं पर मेरी तक़दीर बना ली है
फिज़ा में ख़ुशबू घुलती है, तेरी तहरीर निकली है
तुम्ही ने रंग भर डाले, उसे रंगीन सा बना ली है
ज़माने की हर दौलत मैंने तिरे नाम लिख दी है
क़फ़स से आज दिल ने अपनी ये ज़ंजीर तोड़ दी है
लबों पर अब तेरी पंजीर ही ठहरी है
के तेरी हर अदा ने अब नई तासीर भर दी है
न छेड़ो बात हिज्र की अभी गौरव बाकी है
के मैंने दर्द-ए-दिल की एक तासीर बना ली है