Ghazal shringara

मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है

Gourav Baloria — poet profile photo Gourav Baloria · Hindi
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है by Gourav Baloria — cover image
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है तुमने तो दिलों के बीच इक लकीर बना ली है न पूछो क्या मेरी हस्ती उसने जागीर बना ली है फ़ना को अपनी मैंने शाने की तासीर बना ली है जब थी राह अंधियारी, मैंने इक तनवीर दिखला दी उसने इक मुट्ठी ज़मीं पर मेरी तक़दीर बना ली है फिज़ा में ख़ुशबू घुलती है, तेरी तहरीर निकली है तुम्ही ने रंग भर डाले, उसे रंगीन सा बना ली है ज़माने की हर दौलत मैंने तिरे नाम लिख दी है क़फ़स से आज दिल ने अपनी ये ज़ंजीर तोड़ दी है लबों पर अब तेरी पंजीर ही ठहरी है के तेरी हर अदा ने अब नई तासीर भर दी है न छेड़ो बात हिज्र की अभी गौरव बाकी है के मैंने दर्द-ए-दिल की एक तासीर बना ली है