shringara

हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है

Gourav Baloria — poet profile photo Gourav Baloria · English
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है by Gourav Baloria — cover image
तेरी आवाज़ में जैसे शाम ढलती जाती है हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है तेरे होने से दिल में रोशनी सी पलती जाती है तेरे जाने से जान निकलती जाती है तेरे बिन ये ज़िंदगी बस यूँ ही चलती जाती है तेरी आस में मेरी साँस अटकती जाती है जब तू नहीं तो हर खुशी भी खलती जाती है दूर रहकर तुझसे आग भड़कती जाती है