Ghazal
shringara
सोचती हूँ प्यार करना चाहिए
रंग इस मौसम में भरना चाहिए
सोचती हूँ प्यार करना चाहिए
ज़िंदगी को ज़िंदगी के वास्ते
रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए
दोस्ती से तजरबा ये हो गया
दुश्मनों से प्यार करना चाहिए
प्यार का इक़रार दिल में हो मगर
कोई पूछे तो मुकरना चाहिए
एक गमले में रहकर कटे जिंदगी
हर जगह गुल खिलाना नहीं चाहिए