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रहना नहिं देस बिराना है।

Sant Kabir Das — poet profile photo Sant Kabir Das · Hindi
रहना नहिं देस बिराना है। by Sant Kabir Das — cover image
रहना नहिं देस बिराना है। यह संसार कागद की पुड़िया, बूँद पड़े घुल जाना है॥ यह संसार काँटे की बाड़ी, उलझ-पुलझ मर जाना है। यह संसार झाड़ और झांखर, आग लगे जल जाना है॥ कहत कबीर सुनो भाई साधो, सतगुरु सरन समाना है। यम की फाँस कटेगी तब ही, जब राम नाम लौ लाना है॥

Explanation

Kabir के इस भजन का छोटा और सीधा अर्थ: यह दुनिया स्थायी नहीं है, बस एक अस्थायी पड़ाव है। सब कुछ यहाँ नाज़ुक और नाशवान है, एक दिन खत्म हो जाना है। इंसान इच्छाओं और मोह में उलझकर दुख पाता है। इसलिए सच्चा सहारा बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि सत्य और आत्मज्ञान में है। सीधा सवाल: अगर सब खत्म होना है, तो तुम किस चीज़ को “अपना” मानकर बैठे हो?