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चल हंसा वा देस

Sant Kabir Das — poet profile photo Sant Kabir Das · Hindi
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चल हंसा वा देस, जहाँ पिया बसत हैं भूल गयो है अपनो देस, जहाँ पिया बसत हैं तोर बिना मोरा जी घबरावत, अंखियन जल भर आवत है बिरह की आग लगी घट भीतर, पल-पल मोहे सतावत है काहे को तुम भूल गयो है, माटी में मिल जाई है ये पिंजरा खाली रह जाई, पंछी उड़-उड़ जाई है कहत कबीर सुनो भाई साधो, अमर लोक की बाणी है साहिब मिलन को रस्ता अगम है, गुरु बिन मुक्ति न जानी है

Explanation

इस भजन में कबीर दास जी 'हंस' (आत्मा) को संसार की मोह-माया छोड़कर अपने असली घर (परमात्मा के पास) जाने का संदेश दे रहे हैं। यहाँ 'वा देस' का अर्थ वह स्थान है जहाँ शाश्वत शांति और ईश्वर का वास है।