GODAN (PREMCHAND)
Published2023
Pages416
PublisherB Classic Books ( Arushi book enterprises )
LanguageHindi
ISBN978-8119756841
subject About This Book
Munshi Premchand द्वारा लिखित गोदान हिंदी साहित्य का एक मील का पत्थर उपन्यास है, जो केवल ग्रामीण जीवन का चित्रण नहीं करता, बल्कि भारतीय समाज की गहराई में छिपी असमानताओं और शोषण को बेनकाब करता है।
इस उपन्यास का केंद्र पात्र होरी महतो है, एक साधारण किसान, जिसकी सबसे बड़ी इच्छा एक गाय का दान (गोदान) करने की होती है। लेकिन यह छोटी सी इच्छा उसके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाती है। कर्ज, ज़मींदारी प्रथा, सामाजिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच होरी का जीवन धीरे-धीरे टूटता चला जाता है।
गोदान केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का आईना है, जिसमें
किसानों का आर्थिक शोषण
जाति व्यवस्था की कठोरता
स्त्री की स्थिति
और नैतिक मूल्यों का पतन
साफ़ दिखाई देता है।
इस उपन्यास की खास बात यह है कि प्रेमचंद ने किसी भी चीज़ को सजाया नहीं है। उन्होंने सच को उसी कड़वाहट के साथ रखा है, जैसा वह वास्तव में था। इसलिए गोदान पढ़ना कभी-कभी कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चाई को महसूस करना लगता है।
इस उपन्यास का केंद्र पात्र होरी महतो है, एक साधारण किसान, जिसकी सबसे बड़ी इच्छा एक गाय का दान (गोदान) करने की होती है। लेकिन यह छोटी सी इच्छा उसके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाती है। कर्ज, ज़मींदारी प्रथा, सामाजिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच होरी का जीवन धीरे-धीरे टूटता चला जाता है।
गोदान केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का आईना है, जिसमें
किसानों का आर्थिक शोषण
जाति व्यवस्था की कठोरता
स्त्री की स्थिति
और नैतिक मूल्यों का पतन
साफ़ दिखाई देता है।
इस उपन्यास की खास बात यह है कि प्रेमचंद ने किसी भी चीज़ को सजाया नहीं है। उन्होंने सच को उसी कड़वाहट के साथ रखा है, जैसा वह वास्तव में था। इसलिए गोदान पढ़ना कभी-कभी कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चाई को महसूस करना लगता है।
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person About the Author
Munshi Premchand
Munshi Premchand was one of the greatest Hindi-Urdu writers, known for portraying the harsh realities of Indian society with simplicity and emotional depth. Often called the pioneer of modern Hindi fiction, he focused on themes like poverty, caste discrimination, rural life, and social injustice. His storytelling didn’t romanticize life, it exposed it. Through novels, short stories, and essays, he gave voice to the common man and challenged societal norms.
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