Ghazal
shringara
प्यार नज़रों में आना नहीं चाहिए
प्यार नज़रों में आना नहीं चाहिए
रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए
लोग पागल समझने लगेंगे तुम्हें
रात दिन मुस्कुराना नहीं चाहिए
बारिशों के इरादे ख़तरनाक हैं
अब पतंगें उड़ाना नहीं चाहिए
मैंने ये सोच के दे दिया दिल उसे
दिल किसी का दुखाना नहीं चाहिए